आर.सी.एम.बिजनस एक नया तरीका
आर.सी.एम.बिजनस(RCM BUSINESS) बिल्कुल नया तरीका है । मल्टीलेवल मर्केटिन्ग के फ़ील्ड में यह सबसे अलग है । इसका उद्देश्य और तरीका बिल्कुल अलग है । इसका उद्देश्य इतना महान है कि कोई ज्ल्दी से मानने को तैयार नही होता । क्योकि किसी ने जीवन में ऎसी व्यवसथा देखी ही नही जो इतने सुन्दर तरीके से जीवन को बेहत्तर बना सके ।
इन्सान सदियो से जिस व्यवस्था में जीता आ रहा है वह इतनी जटिल और मुश्किल हो चुकि है, स्वार्थ भावना हर इन्सान के भीतर कूट-कूट कर भर चुकी है, दुसरो का शोषण करने की भावना इतनी फैल चुकि है कि इनसान इस व्यवस्था को स्वीकार कर चुका है । जिसके परिणाम यह है कि इन्सानि रिस्तो में कटुता बढती जा रही है । किसी को भी आपस में लडवाना बहुत आसान हो गया है और आज स्थिति ऎसी बन गयी है कि इनसान को सबसे ज्यदा डर है तो ईनसान से ही है ।
दुनिया मे सम्रद्धि कितनी भी बढ रही हो लेकिन इन्सानियत घटति जा रही है । हम यह भी भूल चुके हैं कि जीवन में इन्सानियत का कितना मोल है । हमे धन का मोल समझ में आता है लेकिन हमे इन्सानियत और धन मे से एक को चुनना हो तो धन को ही चुनेंगे । आज हमे यह समझने की आवश्यकता है कि जीवन में इन्सानियत कितनी मुल्यवान है । धन उसके सामने दो कौडी की वस्तु है ।
यह सत्य है कि धन जीवन में कम महत्त्व की वस्तु नही है लेकिन इन्सानियत से बढकर नही । इसलिये आर.सी.एम. ने ऎसी व्यवस्था बनाई है जो धन भी देती है लेकिन इन्सानी मुल्यों के साथ । यह इतनी आसान सी बात है कि जल्दी किसी के गले नही उतरती । सदियो से जीते आ रहे पुराने तरीके की इतनी आदत हो चुकि है कि यह नई बात उसको जल्दी से समझ में नही आती । जब कुछ बदलता है , जब कुछ नव निर्माण होता है तो दुनिया को स्वीकार करने में थोडा वक्त लगता है । इस व्यवस्था को भी स्वीकार करने में थोडा वक्त लगना स्वभाविक है । हमारे लिये यह सन्तुष्टि की बात है कि लोगो ने इस व्यवस्था को स्वीकार करना शुरू कर दिया है और यह संख्या बढती जा रही है ।
(1००% सफ़लता से साभार )
इन्सान सदियो से जिस व्यवस्था में जीता आ रहा है वह इतनी जटिल और मुश्किल हो चुकि है, स्वार्थ भावना हर इन्सान के भीतर कूट-कूट कर भर चुकी है, दुसरो का शोषण करने की भावना इतनी फैल चुकि है कि इनसान इस व्यवस्था को स्वीकार कर चुका है । जिसके परिणाम यह है कि इन्सानि रिस्तो में कटुता बढती जा रही है । किसी को भी आपस में लडवाना बहुत आसान हो गया है और आज स्थिति ऎसी बन गयी है कि इनसान को सबसे ज्यदा डर है तो ईनसान से ही है ।
दुनिया मे सम्रद्धि कितनी भी बढ रही हो लेकिन इन्सानियत घटति जा रही है । हम यह भी भूल चुके हैं कि जीवन में इन्सानियत का कितना मोल है । हमे धन का मोल समझ में आता है लेकिन हमे इन्सानियत और धन मे से एक को चुनना हो तो धन को ही चुनेंगे । आज हमे यह समझने की आवश्यकता है कि जीवन में इन्सानियत कितनी मुल्यवान है । धन उसके सामने दो कौडी की वस्तु है ।
यह सत्य है कि धन जीवन में कम महत्त्व की वस्तु नही है लेकिन इन्सानियत से बढकर नही । इसलिये आर.सी.एम. ने ऎसी व्यवस्था बनाई है जो धन भी देती है लेकिन इन्सानी मुल्यों के साथ । यह इतनी आसान सी बात है कि जल्दी किसी के गले नही उतरती । सदियो से जीते आ रहे पुराने तरीके की इतनी आदत हो चुकि है कि यह नई बात उसको जल्दी से समझ में नही आती । जब कुछ बदलता है , जब कुछ नव निर्माण होता है तो दुनिया को स्वीकार करने में थोडा वक्त लगता है । इस व्यवस्था को भी स्वीकार करने में थोडा वक्त लगना स्वभाविक है । हमारे लिये यह सन्तुष्टि की बात है कि लोगो ने इस व्यवस्था को स्वीकार करना शुरू कर दिया है और यह संख्या बढती जा रही है ।
(1००% सफ़लता से साभार )
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